चौकिया बने सन्त--

नर्मदा पैदल परिक्रमा कर लौटे हेमन्त, मिली सन्त की उपाधि 

आलीराजपुर---चार माह की  नर्मदा यात्रा पूरी कर वापस    लौटने पर रविदास समाज के हेमंत चौकिया भगत एवं इसदु  निवासी चमारिया डावर समाज के महंतो की उपस्थिति में समाज जनों, परिवार, मित्रों और शुभचिंतको ने स्वागत किया। इसके पश्चात हुए धार्मिक समारोह में कबीर पंथ की विचारधारा की एवं रीति रिवाज के अनुसार  महंतो ने हेमंत चौकिया को कबीरपंथ की चादर विधि कर संत की उपाधि प्रदान की।

उल्लेखनीय है कि हेमंत चौकिया और चमारिया डावर ने विगत 1 नवंबर 2025 को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तीर्थ से नर्मदा नदी की पैदल परिक्रमा यात्रा शुरू की थी जो 4 माह में 3500 किमी लम्बी यात्रा गुजरात की खंभात की खाड़ी राजपीपला, नसवाड़ी मथवाड़, सोंडवा, बड़वानी, महेश्वर, मंडलेश्वर, खंडवा, हरदा, नरसिंहपुर, जबलपुर, व नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक तक  पैदल यात्रा कर  ओंकारेश्वर पहुंचकर परिक्रमा की पूरी की। नगर आगमन पर संत रविदास मंदिर,चामुंडा माता मंदिर मालवई और पंचमुखी  हनुमान मन्दिर पहुँचे ।
 समाजसेवी सुधीर जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि हनुमान मंदिर से शोभायात्रा के रूप में नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए समाजजनों द्वारा  चौकिया को उनके  निवास स्थान नर्मदा नगर पर ले जाया गया।
 यहां पर शाम को स्वागत समारोह एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया इस अवसर पर राजस्थान के बांसवाड़ा  कबीर पंथ के 1008 महंत कल्याणदास साहेब, छकतला के महंत विजय दास साहेब, बरझर के महंत  जयरामदास साहेब, सहित अतिथियों व परिजनों ने हेमंत चौकिया भगत को पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कबीर पंथ के गुरु कल्याणदास साहेब ने कहा कि मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है बड़े पुण्य के उदय के बाद ही भक्ति संभव होती है। हेमंत भगत की नर्मदा परिक्रमा यात्रा इसी पुण्य के कारण हुई है।
 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुधीर जैन ने कहा की 3500 किलोमीटर की विशाल व लम्बी त्याग तपस्या युक्त  नर्मदा मैया की यह दुर्गम पैदल यात्रा बहुत कठिन है।
  इसके पूर्व शबरी भक्त मण्डल के सदस्यगणों ने सुन्दर भजन गाये. पश्चात् रात्री में महंत विजयदास जी महाराज साहेब ने इलेक्ट्रिक हारमोनियम से ढोलक की संगत पर बहुत ही  मधुर आवाज में लोकप्रिय भजनों की अनेक सुंदर प्रस्तुतियां दी।जिन पर मौजूद पुरुषों व महिला भक्तजनों ने जमकर नृत्य भी किया. कार्यक्रम के अंत में बांसवाड़ा से आए कबीर पंथ के गुरु  कल्याणदास साहेब, विजय दास साहेब व जयरामदास साहेब   ने हेमंत चौकिया की धार्मिक प्रवृत्ति को देखते हुए उन्हें कबीर पंथ की चादर ओढ़ाकर उन्हें साधु का दर्जा प्रदान किया साथ ही उनका नवीन नाम साधु हेमंत दास साहेब नामकरण भी किया गया. 
इस अवसर पर  छकतला से  जोगेंद्रसिंह सोलंकी,  चंदरसिंह सोलंकी, बड़ा उण्डवा से धुंदरसिंह सोलंकी, सुखलाल सोलंकी, चांदपुर से भूरलाभाई  हरवाल रामसिंह, कैलाश सस्तीया, नवलसिंह, प्रताप सुनील सस्तीया, आम्बुआ, विश्राम बामनिया रूपाखेड़ा, पिंटू सोलंकी इंदौर, वेस्ता चौहान शिक्षक कोल्याबयड़ा,ग्यारसीलाल भाटिया.देवेंद्र डावर, राजू,दिनेश, जितेंद्र, मोहन चौकिया,  गेंदा, रितेश, बबलू, शंकर, मुकाम सिंह, महेश, कपिल चौकिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। आभार शिक्षक राजेश चौकिया ने माना।

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