आदिवासी समाज ने बिखेरे गरबे के रंग

मारो सोना नो केसरिया रंग तने के बोल पर असाडा राजपूत की महिलाओं ने किया पारंपारिक गरबा,दिया संस्कृति का संदेश --
आलीराजपुर ----
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  नवरात्रि पर्व पर असाडपुरा स्थित श्री अंबे माता मंदिर परिसर में असाड़ा राजपूत समाज की शक्ति भजन मंडल के सदस्यों ने  भव्य पारंपरिक गरबो पर गरबा रास किया।  समाज के अध्यक्ष मानेंद्र सिंह गेहलोत एवं मीडिया संयोजक उमेश वर्मा कछवाहा ने बताया कि विगत रात्रि को असाड़ा राजपूत समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में समाज की मातृशक्ति ने  ड्रेस कोड में सामूहिक गरबा कर सांस्कृतिक समरसता का संदेश दिया।
 आयोजन में महिलाओं ने पुराने और पारंपरिक  गरबा बोल - मारो सोना नो..,  केसरियो रंग तने.., हमे चामुण्डा मा ना चरणे पडया..,
कुम केरया पगलिया.. 
तु तो काली ने कल्याणी... आदि गरबो पर सिर पर मटकी, दीप लेकर एकजुट होकर गरबा की प्रस्तुति दी, जो आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर में श्री अंबे माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी।
कार्यक्रम की विशेषता रही कि 75-80 वर्ष की महिलाओं ने भी एक समान ड्रेस कोड में भाग लेकर संस्कृति और परंपरा को जीवंत किया। वाद्ययंत्र पर सावंतसिंह तंवर, अश्विन पंवार, ज्ञानेंद्र सिंह चावड़ा, विनय तंवर ने संगत दी। देर रात तक गरबा और भजन की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय रहा। कार्यक्रम के प्रभारी अमित सिंह भाटी एवं  शक्ति भजन मंडल अध्यक्ष श्रीमती जयश्री वर्मा ने आभार व्यक्त किया।
 कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के पदाधिकारियों राजेश आर वाघेला, रेखा सिसोदिया, बलवंतसिंह वाघेला, पंकज चंदेल, आशीषसिंह वाघेला, शक्ति भजन मंडल, नवचेतना मंडल अध्यक्ष नीलम गेहलोत, क्षत्रिय राजपूत युवा मंच के अध्यक्ष सुधांशुसिंह चंदेल एवं राजेंद्र सिंह लाला भाटी सहित समाज के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

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