जिला अधिकारी की लापरवाही में संचालित होते आंगनवाड़ी केंद्र
कलेक्टर पहुँची केंद्रों में न बच्चे मिले ना मीनू अनुसार भोजन
3 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ सुपरवाइजर को पद से हटाने के निर्देश
आलीराजपुर--- जिले की आंगनबाड़ियों की स्थिति की कलेक्टर द्वारा समीक्षा या निरीक्षण के दौरान लापरवाही बार-बार सामने आ रही है। इसके पूर्व कलेक्टर ने वीडियो कॉल के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र का हाल जाना तो लापरवाही दिखाई दी।
उसके बाद जिला मुख्यालय क्षेत्र के तीन आंगनबाड़ी केंद्र में भी वही हाल होने के चलते कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए तीन आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ सुपरवाइजर को पद से हटाने के निर्देश दे दिए। आंगनबाड़ी केंद्रों में लगातार मिलती लापरवाही के चलते जिले की जिला कार्यक्रम अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।
जिला मुख्यालय के केंद्रों में ही लापरवाही सामने आ रही है, तो फिर जिले के दूरस्थ क्षेत्र के केंद्रों की क्या स्थिति होगी सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन में लगातार विसंगतियों की सूचनाओं के चलते जिम्मेदारों की भूमिका पर लगातार साल उठ रहे हैं।
क्या है मामला-- जिले में आंगनबाड़ी के सुचारू संचालन को लेकर चलाए जा रहे हैं मुस्कान सेतु अभियान के बावजूद भी आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में कोई सुधार होता दिखाई नहीं दे रहा है।
कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक एवं तीन में आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया। सुबह 11 बजे तक एक भी बच्चा केंद्र में नही था। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती माथुर ने बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर की जांच करने पर उसमें उपस्थित बेहद कम पाई गई, साथ ही कार्यकर्ताओं के उपस्थिति रजिस्टर मेन्यू रजिस्टर एवं भोजन रजिस्टर की जांच में भी सामने आया कि बच्चों को निर्धारित मेन्यू अनुसार सुबह का नाश्ता,भोजन समुह द्वारा नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही शासन द्वारा उपलब्ध कराई खेल सामग्री भी केंद्रों पर नहीं मिली।
अपने निरीक्षण के दौरान मिलती लापरवाही पर कलेक्टर ने सहायिकाओं से पूछताछ करने पर वह किसी तरह का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। जिससे गंभीर लापरवाही दिखाई देने पर कलेक्टर श्रीमती माथुर ने तीनों आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता श्रीमती रेणुका गुप्ता श्रीमती लक्ष्मी विश्वकर्मा श्रीमती लीला डावर को पद से पृथक करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सुपरवाइजर उषा भाभर को भी पद से पृथक करने के निर्देश संबंधित अधिकारी को दिए हैं।
आंगनवाड़ी केंद्रों में शासन के मेन्यू अनुसार भोजन एवं नाश्ता उपलब्ध नहीं करने वाले बर्षा समूह को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने इसके साथ ही शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का क्रियान्वयन नही होने के चलते जिलाधिकारी एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
जिला अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल-- महिला एवं बाल विकास विभाग की जिलाधिकारी मोनिका चौहान जब से जिले में पदस्थ हुई है उसके बाद से ही लगातार विभिन्न क्षेत्रों से आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में होती लापरवाही की खबरें लगातार आती रही है। उसके बाद भी वह इस दिशा में सकारात्मक प्रयास करती दिखाई नहीं दे रही है। जिला मुख्यालय आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों की कम उपस्थिति के साथ मेनू अनुसार भोजन, नाश्ते में होती लापरवाही से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले के विभिन्न केंद्र किस तरह से संचालित हो रहे होंगे।
उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व कलेक्टर श्रीमती माथुर ने वीडियो कॉल के माध्यम से जिले के दूरस्थ आंगनबाड़ी केंद्र अँधारकांच में वीडियो कॉल के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र का हाल जाना था लेकिन वहां भी आंगनबाड़ी केंद्र में लापरवाही उजागर होने पर कलेक्टर ने जिला अधिकारी सहित ब्लाक अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई थी।उसके बाद भी जिला अधिकारी मोनिका चौहान ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये। फल स्वरुप जिलाधिकारी श्रीमती चौहान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कलेक्टर लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों में सुधार करने के साथ ही शासन द्वारा प्रदत्त योजनाओं के लाभ ग्रामीण क्षेत्र के छोटे बच्चों को मिले इस दिशा में सतत प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती चौहान अपने उदासीन कार्यप्रणाली के चलते इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रही है।

