भजन कीर्तन,गरबा रास की धुन में बौराया हल्दी कुंमकुम सक्रांति पर्व
पर्वो से परम्पराओ को सहेजने के साथ एकता को बढ़ाने में दे योगदान--कीर्ति मनीष राठौड़
आलीराजपुर--- सनातन संस्कृति को सहेजते हुए स्थानीय राठौर महिला समाज की महिलाओं ने हल्दी कुमकुम पर्व रणछोड़ राय मन्दिर परिसर धर्मशाला में किया गया जिसमें बड़ी संख्या में आई महिलाओ ने एक दूसरे को कुमकुम लगा कर तिल्ली की चक्की से मुंह मीठा कराया।
इस दौरान महिला मंडल अध्यक्ष कीर्ति मनीष राठौड़ ने महिलाओं को संबोधित करते हुए आह्वान किया कि आज का दिन केवल पर्व मनाने का नहीं बल्कि हमारी परंपराओं को सहेजते हुए आपसी एकता को बढ़ाने का है।
हिंदू संस्कृति में पर्व का अपना एक विशेष महत्व होता है जो हमें विभिन्न पर्वो के माध्यम से हमारी सनातनी सँस्कृति को रेखांकित करते हुए परम्परा को जीवित रखते है।
कार्यक्रम को अखिल भारतीय तेली महासभा महिला मंडल की कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष साधना राजेंद्र टवली ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। जब महिलाएं संगठित होकर सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती है, तभी सही मायने में महिला सशक्तिकरण संभव है।
महिला मंडल मीडिया प्रभारी ज्योति कांतिलाल राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि संक्रांति कुमकुम पर्व पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ बनाया गया। इस भव्य आयोजन में समाज की महिलाओं ने सम्मिलित होकर उत्सव को खास बना दिया। इस दौरान समाज की महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था एक जैसी साड़ियों में सजी महिलाओं ने कार्यक्रम को भव्य एवं उत्सवी स्वरूप प्रदान किया।
भजन कीर्तन और गरबा रास की स्वर लहरियों के बीच महिलाओ ने एक दूसरे को कुमकुम लगाते हुए मकर संक्रांति पर्व की बधाई दी।
कार्यक्रम को गीता मदनलाल राठौर एवं कृति भारत राठौड़ ने संबोधित करते हुए महिला एकता परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक सहभागिता को समय की मांग बताया।


