ब्रम्हाकुमारी में किया वृद्धजनों का सम्मान
भौतिकवादी एवं भागदौड़ की जिंदगी में वृद्धजनों को दे समय--माधुरी बहन
आलीराजपुर -- वृद्धाजन हमारे समाज परिवार और संस्कृति की जड़ है। वह पूरे परिवार को संजो कर रखते हैं, लेकिन वर्तमान की भौतिकवादी और भाग दौड़ भरी जीवन शैली के चलते हम उन्हें पर्याप्त समय नहीं दे पाते। जिसके चलते वे उपेक्षित महसूस करते हैं। ऐसे में कई बार परिस्थितियों इतनी गंभीर हो जाती है, कि माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ दिया जाता है। जिससे उनका मानसिक और भावनात्मक संतुलन टूट जाता है।
उक्त विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा भारत सरकार एवं राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के समाज प्रभाव अभियान के अंतर्गत आयोजित वृद्धजनों के सम्मान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहें।
माधुरी दीदी ने विशेष कर युवा पीढ़ी से आव्हान करते हुए कहा है कि वृद्ध जनों के साथ समय बिताए। उनकी बातों को सुने और उन्हें सम्मान दें ताकि वे एकाकी पल से मुक्त रह सके।
इस दौरान समाज सेवी सुदामा पवार ने कहा कि आज हम धर्म से दूर होते जा रहे हैं, जबकि धर्म ही हमें मानवता का पाठ पढ़ाता है।जो व्यक्ति अपने धर्म को भूल जाता है वह सब कुछ भूल जाता है।
अपने सम्मान से अभिभूत शहर के उद्योगपति कृष्णकांत कोठारी में कहा की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नवीनता के साथ-साथ संस्कार युक्त शिक्षा की मांग की आवश्यकता है ताकि युवा वर्ग समाज के मध्य जनों का सम्मान करना सीखे।
वही अनिल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रगति और विकास की दौड़ में वृद्ध जनों की सम्मान को भूलते जा रही हैं उन्होंने भी आवाहन किया कि हम चाहे कितना भी भौतिक विकास क्यों न कर ले अपनी संस्कृति और अध्यात्म को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि अध्यात्म ही हमें नैतिक बनता है और नैतिकता सभी को सम्मान की सीख देती है।
कार्यक्रम के दौरान नगर के वरिष्ठ समाज जन और रामेश्वर दीक्षित कृष्णकांत मंत्री रमेश कुमार अनिल जैन कृष्णकांत कोठारी सुदामा पवार दो कन्हैयालाल गुप्ता सहित कई वरिष्ठजन का ब्रह्मा कुमार ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस दौरान सानिया बहन द्वारा राज योग का अभ्यास करवाया गया।
कार्यक्रम में लगभग 80 वृद्ध जन के साथ बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे।
