सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में हुआ तरणताल का शुभारंभ
मा के विवेक से राष्ट्र को एक श्रेष्ठ नागरिक मिलता है--सन्तोष विश्वकर्मा
आलीराजपुर -- शिशु शिक्षा की प्रथम शिक्षक मां है ।मां ही बच्चों को बाहरी दुनिया से परिचय कराती है। एज़ दौरान लालन पालन में मां का कोमल मन हर बार बच्चों को अनचाहे भय से मुक्त रखना चाहता है।फल स्वरुप बच्चे का विकास अवरुद्ध हो जाता है।
उक्त विचार सहप्रांत संयोजक विद्या भारती मालवा संतोष विश्वकर्मा ने सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बगीचे में सौन्दर्यकरण के साथ तरणताल के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित करते हुए कहें।
विश्वकर्मा ने कहां की मां यदि विवेक सूझबूझ से बच्चों का पोषण करती है तो राष्ट्र को एक श्रेष्ठ नागरिक मिल सकता है मुख्य अतिथि ने उदाहरण देते हुए बताया कि लव कुश ध्रुव प्रहलाद को हम उनके त्याग, बलिदान, वीरता आदि गुणों से याद करते हैं, क्योंकि पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हें ही याद किया जाता है जिन्होंने जीवन में देश धर्म के लिए कार्य किया हो।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिशु शिक्षा को पूर्ण रूप से बच्चे की बोझ से मुक्त करते हुए गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया है इसलिए विद्या भारती का लक्ष्य भी भैया बहनों का सर्वांगीण विकास का है जिसके लिए तीन से आठ वर्ष की आयु जिसे फाउंडेशनस्टेज स कहा जाता है, उसमें 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं का समावेश करते हुए पंचभूत पर ध्यान दिया गया है।
इस दौरान संचालन समिति अध्यक्ष पुष्प लता शाह, सहसचिव श्याम गुप्ता, उपाध्यक्ष अनिल जैन, सतीश भाटी, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, अभिभावक एवं बच्चे उपस्थित थे। कार्यक्रम के आरम्भ में विद्यालय संचालन की भूमिका पर विद्यालय प्राचार्य बलिराम बिल्लोरे ने जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन साक्षी राठौर एवं आभार रोमिल जैन ने माना।

