शराब दुकान के खिलाफ आदिवासी समाज का धरना ----

शराब ठेकेदार राय जनभावनाओं से करते खिलवाड़ 
मंदिर और जननायकों की मूर्ति के बीच संचालित होती शराब दुकान
आदिवासी समाज ने किया धरना प्रदर्शन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
आलीराजपुर/आजादनगर ---
जिले में शराब ठेकेदारों के रसूक के आगे आबकारी विभाग बौना साबित हो रहा है ।ठेकेदार की हटधर्मी और किसी की ना सुनने की जीत के साथ अपने लाभ को सर्वोपरि मानने के चलते आजाद नगर के चौराहे पर जन भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए  शराब दुकान का संचालन किया जा रहा है।
आदिवासी समाज ने शराब  दुकान के विरोध में धरना प्रदर्शन करते हुए आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
 आदिवासी समाज का  आरोप हे कि दुकान के एक तरफ अंबे माता जी का मंदिर है, तो दूसरी तरफ जननायकों की मूर्ति। फिर भी ठेकेदार ने अपनी जिद और आर्थिक लाभ के गणित के चलते शराब दुकान खोल दी।
  मिली जानकारी अनुसार आदिवासी समाज ने शराब दुकान का विरोध करते हुए पहले इसकी जानकारी आबकारी विभाग के साथ प्रशासन को देते हुए बताया था कि ग्राम सभा में इस शराब दुकान के संचालन की अनुमति नहीं दी है।फलस्वरूप  शराब दुकान को अन्य जगह स्थानांतरित करे,लेकिन ठेकेदार के वैभव एवं रसूख के चलते आबकारी विभाग लाचार बन गया।
 आदिवासी समाज ने जन भावनाओं को ठेस पहुंचाने के चलते ठेकेदार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए शराब दुकान को जल्द ही हटाने के लिए मोर्चा खोल दिया।
क्या हे मामला --आजाद नगर के कट्ठीवाड़ा रोड चौराहे  पर  बिल्झर में शराब के अधिकृत ठेकेदार ने शराब की दुकान को उस स्थान पर संचालित कर रहा हे जिसके एक और  मां अंबे का मंदिर है, तो दूसरी और जननायको की मूर्ति। हद तब हो गई जब  आदिवासी समाज द्वारा शराब दुकान का विरोध करते हुए आबकारी विभाग को इस पर जल्द निर्णय लेने के लिए पूर्व में आवेदन दिया था, लेकिन, ठेकेदार के रसूक के सामने लोगो की जनभावनाओं की आवाज आबकारी  विभाग के जिम्मेदारो तक नहीं पहुंची। 
फलस्वरूप विभाग ठेकेदार  को दुकान हटाकर अन्य स्थान पर संचालित करने के निर्देश देने की जोहमत नहीं उठा पा रहे हैं। इसलिए आदिवासी समाज ने सोमवार को शराब दुकान को हटाने के लिए जननायकों की मूर्ति स्थान पर धरना प्रदर्शन आरंभ कर दिया। 
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं आदिवासी समाज के सामाजिक कार्यकर्ता धर्मेंद्र अजनार के अनुसार इस स्थान पर शराब की दुकान संचालित करना मतलब जननायको  का अपमान करना है। इसके अलावा भी शराब दुकान संचालक के लिए ग्राम सभा के अनुमोदन की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां इस तरह की कोई भी अनुमति नहीं दी। उसके बावजूद भी शराब ठेकेदार शराब दुकान का बिना किसी डर के संचालन कर रहा है। 
मुंह देख भाव ---इसके साथ ही सामाजिक का कार्यकर्ता धर्मेंद्र अजनार ने शराब दुकान के संचालकों पर आरोप लगाते हुए कहां है कि शासन द्वारा निर्धारित दर दुकान पर नहीं लगाई जाकर सभी ग्राहकों को अलग-अलग भाव से शराब बेची जा रही है।
अजनार की माने तो ग्राहकों के मुंह देख कर मूल्य ले रहे हैं ।
किसी ग्राहक से बियर के 2500 हजार तो किसी से 3000 हजार तो किसी से 3500/लिए जा रहे हैं। क्या शासन ने इस तरह से अलग-अलग दामों में शराब बेचने की छूट शराब ठेकेदार को दे रखी है।
धरना प्रदर्शन के दौरान दुकान पर लगाई भाव सूची -- समाज द्वारा दुकान हटाने के लिए किया जा रहे धरना प्रदर्शन के दौरान जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दुकान पर शराब मूल्य सूची नहीं होने का मुद्दा उठाया तो तुरंत ही आबकारी विभाग के जिम्मेदार हरकत में आए और शराब दुकान के संचालकों को भाव सूची लगाने के निर्देश दिए। निर्देश देने के कुछ देर बाद ही दुकान के बाहर भाव सूची चस्पा हो गई।
क्या बोले जिम्मेदार --- शासन के नियमानुसार शराब दुकान संचालित हो रही है।ज्ञापन मिला है।7 दिनों में इसकी जांच कर वरिष्ठ अधिकारीयो से मार्गदर्शन ले कर उचित निर्णय लेंगे।
जयश्री वर्मा,निरीक्षक आबकारी विभाग ,वृत्त आजादनगर।

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