सुखी और शांत जीवन पर ब्रह्माकुमारी दीपा की चौकी में हुई गोष्ठी
अधिक पाने की चाह में मनुष्य जीवन की छोटी छोटी खुशियां,प्रकृति की सुंदरता और परिवार का प्रेम भूल जाता है -नारायण भाई
आलीराजपुर ---वर्तमान में मनुष्य की इच्छा बढ़ती जा रही है, जिसके चलते वह जीवन में उपलब्ध संसाधनों से संतुष्ट नहीं हो पता है। मनुष्य हमेशा अधिक पाने की इच्छा के चलते जीवन का आनंद लेना भूल जाते हैं। मूलत मनुष्य पद,प्रतिष्ठा, सुविधा पाने की दौड़ में इतना व्यस्त हो जाता है कि जीवन में पहले से मौजूद छोटी-छोटी खुशियां,प्रकृति की सुंदरता, परिवार का प्रेम और आशीर्वाद देख ही नहीं पाता है।
उक्त विचार दीपा की चौकी स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में सुखी एवं शांत जीवन के विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी धार्मिक प्रभाग के जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने कहे।
ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने कहा कि मनुष्य को जीवन का वास्तविक सुख तब मिलता है, जब वह कृतज्ञता और संतोष का भाव विकसित करता है, साथ ही वह यह महसूस करे, जो मिला है वह एक वरदान है। तब ही मन शांत और प्रसन्न रहने लगेगा। बावजूद इसके मनुष्य अधिक की चाह करता रहता है और परिवार का प्रेम, स्वास्थ्य, प्रकृति की सुंदरता, मन की शांति को महसूस नहीं कर पाता है।
संसार एक नाटक शाला -- गोष्टी को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने कहा की संसार एक नाटक शाला है। इसमें हमें अपने लिए ही कर्म के बीच बोना है। कोई हमारे भविष्यफल के कर्म का बीज बो नहीं सकता। हम जो कर्म करेंगे वह भविष्यफल बनता है। हमारे जितने सुंदर विचार, श्रेष्ठ भावनाएं, कल्याण के विचार और सबके प्रति पवित्र भावनाएं यही भविष्य को श्रेष्ठ बनाने का आधार बनता है।
विचार गोष्ठी को सोंडवा के भुर सिंह भाई ने संबोधित करते हुए कहा है कि पहले हम अच्छे साहित्य पढ़ते थे जिससे मन शांत हो जाता था। शांत मन से एक अच्छी निर्णय शक्ति विकसित होती है। हम अच्छे विचार, अच्छे साहित्य अपने जीवन में उतर नहीं पाते हैं, जिसके चलते बीमारियां समस्याएं बढ़ती जा रही है। हर विचारों का हमारे शरीर में केमिकल बनता है। वही नकारात्मक विचार डालने से हमारे जीवन में कॉर्टिसोल हारमोंस बनने से जीवन का आनंद धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है।